डिज़ाइन एजेंसी के लिए सभी क्लाइंट और उनका काम एक जगह रखने का ऐप
हर क्लाइंट का पूरा प्रोजेक्ट हिस्ट्री, फाइलें और नोट्स एक ऐप में।
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हर क्लाइंट का पूरा प्रोजेक्ट हिस्ट्री, फाइलें और नोट्स एक ऐप में।
यह किसके लिए है
इंदौर, पुणे या कोच्चि जैसी जगह की छोटी डिज़ाइन और मार्केटिंग एजेंसी। मालिक खुद क्लाइंट से बात करता है, साथ में दो-तीन डिज़ाइनर, एक कॉपी लिखने वाला और कुछ फ्रीलांसर काम करते हैं। दिक्कत उस दिन चुभती है जब पुराना क्लाइंट फोन करके कहता है कि पिछले दिवाली वाले पोस्टर की फाइल भेज दो, और मालिक को याद ही नहीं आता कि वह किस डिज़ाइनर के लैपटॉप में है और कौन सा वर्शन फाइनल हुआ था।
आज की परेशानी
आज सब कुछ WhatsApp में है। हर क्लाइंट का अलग ग्रुप, उसी में ब्रीफ, उसी में अप्रूवल, उसी में पेमेंट की बात। फाइलें कभी ड्राइव में, कभी फोन की गैलरी में, कभी डिज़ाइनर के लैपटॉप में। फॉलो-अप के लिए एक एक्सेल शीट बनाई थी, वह अब दो महीने पुरानी है। क्लाइंट दिन में तीन बार पूछता है कि काम कहाँ तक पहुँचा, और वही बात बताने में आधा दिन निकल जाता है। जो क्लाइंट चुप हो जाता है, वह चुपचाप छूट भी जाता है, क्योंकि याद दिलाने वाला कोई नहीं। इनवॉइस भेज दी, पैसा आया या नहीं, यह महीने के आखिर में बैंक खाता देखकर पता चलता है।
ऐप क्या करता है, स्क्रीन दर स्क्रीन
- क्लाइंट लिस्ट — मालिक और टीम यहाँ सारे क्लाइंट एक जगह देखते हैं, कौन चालू है, कौन रुका है और किससे आज बात करनी है।
- क्लाइंट का पेज — मालिक और टीम यहाँ एक क्लाइंट का पूरा इतिहास खोलते हैं, उसके सारे प्रोजेक्ट, भेजी गई फाइलें, अंदर की नोट्स और पिछली बातचीत।
- काम और स्टेटस — डिज़ाइनर और कॉपी लिखने वाला यहाँ अपना काम उठाते हैं और उसका स्टेटस बदलते हैं, जिससे मालिक को पूछना न पड़े।
- फाइल और अप्रूवल — टीम यहाँ से नया डिज़ाइन क्लाइंट को अप्रूवल के लिए भेजती है और हर वर्शन अलग दिखता है।
- क्लाइंट पोर्टल — क्लाइंट अपने लॉगिन से यहाँ सिर्फ अपना काम देखता है, फाइलें डाउनलोड करता है और अप्रूवल देता है।
- फॉलो-अप — मालिक यहाँ अगली बात की तारीख रखता है और उस दिन ऐप याद दिला देता है।
- इनवॉइस और पेमेंट — मालिक यहाँ इनवॉइस बनाता है और क्लाइंट अपने पोर्टल से वहीं पैसा भेज देता है।
इसे कौन इस्तेमाल करता है और यह क्या दर्ज रखता है
- क्लाइंट — नाम, कंपनी, फोन, जिस शहर से है, कब से जुड़ा है, और किस तरह का काम कराता है। पूरी जानकारी मालिक और टीम को, अपनी जानकारी क्लाइंट को।
- प्रोजेक्ट — किस क्लाइंट का है, क्या बनाना है, कब तक देना है, कौन बना रहा है और आज कहाँ तक पहुँचा। क्लाइंट को अपने प्रोजेक्ट का स्टेटस दिखता है, किसी और का नहीं।
- फाइलें और अप्रूवल — कौन सी फाइल, किस प्रोजेक्ट की, कौन सा वर्शन, कब भेजी गई और क्लाइंट ने हाँ कहा या बदलाव माँगा। क्लाइंट को सिर्फ उसे भेजी गई फाइलें।
- नोट्स और फॉलो-अप — बातचीत में क्या तय हुआ, अगली बात कब करनी है और अंदर की राय। अंदर की नोट्स सिर्फ मालिक और टीम के लिए, क्लाइंट को कभी नहीं।
- इनवॉइस — किस क्लाइंट की, किस काम की, कितनी रकम, कब भेजी और पैसा आया या बाकी है। क्लाइंट को अपनी इनवॉइस, बाकी सब मालिक को।
कारोबार के लिए क्या बदलता है
पुरानी फाइल ढूँढने में जो समय जाता था, वह बचता है, क्योंकि हर क्लाइंट का काम उसके नाम के नीचे पड़ा रहता है। क्लाइंट स्टेटस पूछने के लिए फोन नहीं करता, वह खुद पोर्टल में देख लेता है। कौन सा वर्शन फाइनल हुआ, इस पर बहस खत्म हो जाती है, क्योंकि अप्रूवल लिखित में दर्ज है। जो क्लाइंट चुप पड़ जाता था, वह छूटता नहीं, क्योंकि फॉलो-अप की तारीख याद दिला देती है। बाकी पैसा सामने दिखता है, इसलिए इनवॉइस महीनों लटकती नहीं। और कोई डिज़ाइनर एजेंसी छोड़े, तो उसका काम उसके लैपटॉप के साथ नहीं जाता।
वह एक फ़ैसला जो मायने रखता है
सबसे बड़ा फैसला यह है कि क्लाइंट को अपना लॉगिन दें या हर बार WhatsApp पर लिंक भेज दें। लिंक भेजना शुरू में आसान लगता है, क्लाइंट को कुछ सीखना नहीं पड़ता। लेकिन लिंक उसी चैट में दब जाता है, पुराने लिंक घूमते रहते हैं और यह पता ही नहीं चलता कि कौन सी फाइल किसने देखी और कब हाँ कहा। लॉगिन देना बेहतर है। क्लाइंट एक ही जगह से अपना सारा काम, पुरानी फाइलें और इनवॉइस देखता है, और आपकी अंदर की नोट्स उसकी आँख से दूर रहती हैं। साथ में WhatsApp का बटन रखिए, ताकि पोर्टल देखने के बाद बात करनी हो तो वह सीधे चैट खोल ले।
पहले क्या बनाएँ, और क्या बाद में
पहले बस तीन चीज़ें बनाइए, क्लाइंट लिस्ट अपने पूरे इतिहास के साथ, टीम के लिए काम और स्टेटस, और क्लाइंट का पोर्टल जिसमें स्टेटस और फाइलें दिखें। फॉलो-अप की याद दिलाने वाली स्क्रीन इसी के साथ रख लीजिए, वह सबसे ज़्यादा काम आती है। इनवॉइस और ऑनलाइन पेमेंट बाद में जोड़ लीजिए, पहले यह तय हो जाए कि टीम रोज़ ऐप में स्टेटस बदल रही है। टाइम शीट, खर्च का हिसाब और प्रस्ताव बनाने वाली स्क्रीन शुरू में छोड़ दीजिए, वरना ऐप भारी हो जाएगा और कोई इस्तेमाल नहीं करेगा।
BooDoo इसे कैसे बनाता है
आप अपनी भाषा में लिखकर बता देते हैं कि आपकी एजेंसी में काम कैसे चलता है, और BooDoo यह ऐप बना देता है। इसके पीछे असली डेटाबेस और लॉगिन बनता है, जिसमें मालिक, टीम और क्लाइंट को अलग-अलग स्क्रीन दिखती हैं। एक ही बात कहने पर अपने लाइव पते वाली वेबसाइट और Android ऐप, दोनों मिलते हैं, जिसे आप अपने Google Play खाते से डाल सकते हैं और अपनी एजेंसी का डोमेन जोड़ सकते हैं। पेमेंट और WhatsApp का बटन ज़रूरत पड़ने पर जुड़ जाता है। आगे कुछ बदलना हो, तो बदलाव भी बोलकर ही कराइए।
कैसे पता चलेगा कि यह काम कर रहा है
क्लाइंट के ग्रुप में अब यह मेसेज नहीं आता कि लेटेस्ट फाइल भेज दो या काम कहाँ तक पहुँचा। अप्रूवल पोर्टल से आता है, और पुराने क्लाइंट की दो साल पहले की फाइल आप उसके नाम के नीचे से मिनट में निकाल देते हैं।
इसे बनाइए
यह अनुरोध चिपकाइए और ऐप बन जाएगा।
मेरी छोटी डिज़ाइन और मार्केटिंग एजेंसी है और मुझे ऐसा ऐप चाहिए जिसमें मेरे सारे क्लाइंट एक लिस्ट में रहें और हर क्लाइंट के अंदर उसके सारे प्रोजेक्ट, भेजी गई फाइलें हर वर्शन के साथ, अप्रूवल और मेरी अंदर की नोट्स दिखें। मेरे डिज़ाइनर अपने काम का स्टेटस बदल सकें और नई फाइल क्लाइंट को अप्रूवल के लिए भेज सकें। क्लाइंट अपने लॉगिन से सिर्फ अपना काम, अपनी फाइलें और अपनी इनवॉइस देखे, मेरी अंदर की नोट्स उसे कभी न दिखें, और वह वहीं से हाँ कह सके या बदलाव लिख सके। एक स्क्रीन फॉलो-अप की तारीख रखने के लिए चाहिए जो उस दिन मुझे याद दिला दे। इनवॉइस में ऑनलाइन पैसा भेजने का बटन हो और क्लाइंट के नंबर पर WhatsApp खोलने वाला बटन भी। टीम के लिए फोन ऐप और मेरे लिए पीछे वेबसाइट, दोनों चाहिए।
यह अनुरोध चिपकाइए और ऐप बन जाएगा, असली डेटाबेस, साइन-इन और फ़ोन ऐप के साथ। बाद में कुछ भी बदल सकते हैं।
इसी तरह के तैयार ऐप
पहले चलाकर देखिए, फिर अपने वर्कस्पेस में कॉपी करके अपना बना लीजिए।
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