दंत चिकित्सा क्लिनिक के लिए पेशेंट रिकॉर्ड और अपॉइंटमेंट ऐप
हर पेशेंट का इलाज, अगली अपॉइंटमेंट और डॉक्यूमेंट्स एक जगह सहेजें।
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हर पेशेंट का इलाज, अगली अपॉइंटमेंट और डॉक्यूमेंट्स एक जगह सहेजें।
यह किसके लिए है
बाज़ार या कॉलोनी में चलने वाला छोटा डेंटल क्लिनिक। मालिक खुद डेंटिस्ट हैं, रिसेप्शन पर एक स्टाफ बैठती है, एक असिस्टेंट चेयर के साथ रहता है, और हफ्ते में कुछ दिन विज़िटिंग ऑर्थोडॉन्टिस्ट आते हैं। दिक्कत उस वक्त काटती है जब रूट कैनाल की दूसरी सिटिंग वाला पेशेंट महीनों बाद लौटता है और पूछता है कि कौन सा दांत चल रहा था। रजिस्टर पलटना पड़ता है, एक्स-रे का लिफाफा ढूंढना पड़ता है, और पेशेंट कुर्सी के पास खड़ा इंतज़ार करता है।
आज की परेशानी
अपॉइंटमेंट डायरी में पेंसिल से लिखते हैं। कभी मैं लिख देता हूँ, कभी स्टाफ, और दोपहर में दो पेशेंट एक ही टाइम पर आ जाते हैं। पुराना रिकॉर्ड रजिस्टर में है, एक्स-रे की फिल्म लिफाफे में, और पर्चे की फोटो मेरे व्हाट्सऐप में कहीं पड़ी है। जिसकी सिटिंग छूट गई, उसे याद दिलाने का कोई तरीका नहीं। स्केलिंग के लिए जिन्हें छह महीने बाद बुलाना है, वह लिस्ट कहीं बनती ही नहीं। जो पेशेंट किस्तों में पैसा दे रहा है, उसका बाकी हिसाब स्टाफ की कॉपी में रहता है और महीने के आखिर में समझ नहीं आता कि कितना बाहर पड़ा है। इलाज अधूरा छोड़ कर गए पेशेंट अपने आप तो नहीं लौटते।
ऐप क्या करता है, स्क्रीन दर स्क्रीन
- रिसेप्शन का अपॉइंटमेंट बोर्ड — रिसेप्शन स्टाफ दिन और हफ्ते के खाली स्लॉट देखकर डॉक्टर और चेयर के हिसाब से अपॉइंटमेंट लगाती है, जिससे एक ही समय पर दो बुकिंग नहीं होती।
- पेशेंट की फाइल — डॉक्टर और स्टाफ यहीं से पेशेंट का पिछला इलाज, कौन सा दांत, कौन सी सिटिंग, दवा से एलर्जी और उसके एक्स-रे एक जगह देख लेते हैं।
- आज के इलाज और पैसे की एंट्री — डॉक्टर या स्टाफ एक ही जगह लिख देते हैं कि आज क्या किया, अगली सिटिंग कब है, इलाज का कुल पैसा कितना है और आज कितना जमा हुआ।
- फॉलो-अप और रिकॉल लिस्ट — स्टाफ और मालिक के सामने उन पेशेंट की लिस्ट रहती है जिनकी सिटिंग, ब्रेसेस की टाइटनिंग या स्केलिंग की तारीख आ रही है, और याद दिलाने का मैसेज वहीं से जाता है।
- पेशेंट का अपना पेज — पेशेंट अपने लॉगिन से अपनी अगली तारीख, अपने एक्स-रे और पर्चे, और बाकी पैसा देखता है, और क्लिनिक से बात करने के लिए व्हाट्सऐप बटन दबाता है।
- मालिक का हिसाब — मालिक देखता है कि कौन से इलाज बीच में चल रहे हैं, कितना पैसा बाहर पड़ा है और कौन फॉलो-अप पर लौटा ही नहीं।
इसे कौन इस्तेमाल करता है और यह क्या दर्ज रखता है
- पेशेंट — नाम, फोन नंबर, उम्र, पता, दवा से एलर्जी और पुरानी बीमारी के नोट। डॉक्टर और रिसेप्शन सबकी फाइल देख सकते हैं, पेशेंट सिर्फ अपनी।
- अपॉइंटमेंट — तारीख, समय, कौन सा डॉक्टर और कौन सी चेयर, आने की वजह, और आया या नहीं आया। स्टाफ और डॉक्टर पूरा बोर्ड देखते हैं, पेशेंट को अपनी तारीख दिखती है।
- इलाज का रिकॉर्ड — कौन सा दांत, कौन सा इलाज, कौन सी सिटिंग, अगली तारीख और डॉक्टर के नोट। नोट डॉक्टर और क्लिनिक तक रहते हैं, पेशेंट को इलाज का सीधा-सादा ब्यौरा दिखता है।
- डॉक्यूमेंट — एक्स-रे, OPG, पर्चा, लैब की रिपोर्ट और बिल, पेशेंट की फाइल से जुड़े हुए। क्लिनिक सब देखता है, पेशेंट अपने ही कागज़ देखता और डाउनलोड करता है।
- पैसे का हिसाब — इलाज का तय पैसा, कब कितना जमा हुआ, नकद या ऑनलाइन, और कितना बाकी है। मालिक और रिसेप्शन सबका देखते हैं, पेशेंट को अपना बाकी दिखता है।
कारोबार के लिए क्या बदलता है
एक ही समय पर दो पेशेंट नहीं बुलाए जाते। पुराना रिकॉर्ड ढूंढने में वक्त नहीं जाता, डॉक्टर पेशेंट के बैठने से पहले पिछली सिटिंग पढ़ चुका होता है। अधूरे इलाज वाले पेशेंट याद दिलाने का मैसेज पाकर लौट आते हैं, और स्केलिंग के लिए बुलाने की लिस्ट अपने आप सामने आ जाती है। एक्स-रे की फिल्म खोने का डर खत्म, पेशेंट को उसके कागज़ अपने फोन में मिलते हैं। बाकी पैसा किसी कॉपी में छिपा नहीं रहता, महीने के आखिर में साफ दिखता है कि किससे क्या लेना है।
वह एक फ़ैसला जो मायने रखता है
सबसे बड़ा फैसला यह है कि पेशेंट अपने लॉगिन में कितना देख पाए। एक रास्ता है कि डॉक्टर के पूरे नोट उसी तरह दिखा दें। दूसरा रास्ता है कि उसे सिर्फ काम की बात दिखे, यानी कौन सा इलाज चल रहा है, अगली तारीख, उसके एक्स-रे और पर्चे, और बाकी पैसा। दूसरा रास्ता चुनें। नोट में डॉक्टर छोटे संकेत और आधे शब्द लिखता है, जिन्हें पेशेंट अपने हिसाब से पढ़कर घबरा जाता है और फोन करता है। नोट डॉक्टर और क्लिनिक के पास रहें, और पेशेंट के पेज पर वही चीज़ें रखें जिनसे उसका काम चलता है।
पहले क्या बनाएँ, और क्या बाद में
पहले वही बनाएँ जिसे रिसेप्शन हर दिन छूती है, यानी अपॉइंटमेंट बोर्ड, पेशेंट की फाइल, इलाज और पैसे की एंट्री, डॉक्यूमेंट अपलोड और फॉलो-अप का रिमाइंडर। पेशेंट का पेज शुरू में सिर्फ देखने भर का रखें, अगली तारीख, उसके कागज़ और बाकी पैसा। ऑनलाइन एडवांस, ब्रेसेस का पूरा महीने-दर-महीने प्लान, लैब के काम की ट्रैकिंग, स्टॉक और दूसरी ब्रांच बाद में जोड़ें। जब तक पेंसिल वाली डायरी बंद नहीं होती, बाकी चीज़ें जोड़ने का कोई फायदा नहीं।
BooDoo इसे कैसे बनाता है
आप अपनी भाषा में अपने क्लिनिक का काम लिखकर बताते हैं और BooDoo ऐप बना देता है। पीछे असली डेटाबेस और लॉगिन बनता है, जिसमें मालिक-डॉक्टर, रिसेप्शन स्टाफ और पेशेंट को अलग-अलग स्क्रीन दिखती हैं। एक ही बात कहने पर वेबसाइट अपने लाइव पते पर मिलती है और एंड्रॉयड ऐप भी, जिसे आप अपने गूगल प्ले अकाउंट से डाल सकते हैं, और अपना डोमेन जोड़ा जा सकता है। याद दिलाने वाले मैसेज, ऑनलाइन पेमेंट और क्लिनिक से चैट खोलने वाला व्हाट्सऐप बटन तैयार जोड़ों से लग जाते हैं। बाद में बदलाव बोलकर करा सकते हैं।
कैसे पता चलेगा कि यह काम कर रहा है
रिसेप्शन की पेंसिल वाली डायरी हफ्तों से खाली पड़ी है। डॉक्टर पेशेंट के कुर्सी पर बैठने से पहले उसकी पिछली सिटिंग पढ़ चुका होता है, और पेशेंट यह पूछने के लिए फोन नहीं करते कि मेरी अगली तारीख क्या थी।
इसे बनाइए
यह अनुरोध चिपकाइए और ऐप बन जाएगा।
मेरा डेंटल क्लिनिक है और मुझे हर पेशेंट का पूरा रिकॉर्ड एक जगह चाहिए। रिसेप्शन पर बैठी स्टाफ अपॉइंटमेंट बुक करे, डॉक्टर और चेयर के हिसाब से खाली स्लॉट दिखें और एक ही समय पर दो बुकिंग न हो। हर पेशेंट की फाइल में नाम, नंबर, उम्र, दवा से एलर्जी, कौन सा दांत, कौन सा इलाज, कौन सी सिटिंग और डॉक्टर के नोट रहें, और एक्स-रे, OPG, पर्चा और बिल उसी फाइल में अपलोड हो जाएं। इलाज का कुल पैसा, जमा और बाकी भी दिखे। अगली सिटिंग और स्केलिंग की तारीख आने पर पेशेंट को याद दिलाने का मैसेज चला जाए। पेशेंट अपने लॉगिन से सिर्फ अपनी तारीख, अपने कागज़ और बाकी पैसा देखे, और क्लिनिक से बात करने के लिए व्हाट्सऐप बटन हो। मुझे वेबसाइट और एंड्रॉयड ऐप दोनों चाहिए।
यह अनुरोध चिपकाइए और ऐप बन जाएगा, असली डेटाबेस, साइन-इन और फ़ोन ऐप के साथ। बाद में कुछ भी बदल सकते हैं।
इसी तरह के तैयार ऐप
पहले चलाकर देखिए, फिर अपने वर्कस्पेस में कॉपी करके अपना बना लीजिए।
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