BooDoo
क्या बनाएँ · 2026-10-08

रेस्तरां में स्टाफ को काम देने और नियंत्रण रखने का ऐप

किचन और हॉल टीम को अलग-अलग काम दें, और एक जगह से सब पर नज़र रखें।

Run the team · Restaurant · India

किचन और हॉल टीम को अलग-अलग काम दें, और एक जगह से सब पर नज़र रखें।

यह किसके लिए है

चालीस-पचास कुर्सियों का रेस्तरां, दो शिफ्ट में चलता है। मालिक के साथ एक मैनेजर, तीन-चार लोग किचन में, चार-पाँच वेटर, एक कैशियर और सफ़ाई वाला। मालिक अक्सर बाहर होता है या दूसरा आउटलेट देख रहा होता है। दिक्कत उस वक़्त चुभती है जब शाम सात बजे हॉल भर जाता है, एक वेटर छुट्टी पर है, फ्रिज का तापमान किसी ने लिखा ही नहीं, और एक मेज़ पर छूट देनी है लेकिन मैनेजर मालिक को फ़ोन मिला रहा है।

आज की परेशानी

काम बाँटने का तरीक़ा एक ही है, आवाज़ देना। सुबह मैं मैनेजर को बोल देता हूँ, वह रसोई में बोल देता है, और शाम तक आधी बातें भूल जाती हैं। स्टाफ का एक व्हाट्सऐप ग्रुप है, उसमें काम की बात मीम और छुट्टी की बातों के बीच कहीं खो जाती है। किसने क्या किया, पता नहीं चलता। बंद करते वक़्त की चेकलिस्ट कागज़ पर है, कभी भर जाती है कभी नहीं। छूट और झूठन की मंज़ूरी के लिए दिन में कई फ़ोन आते हैं। महीने के आख़िर में पता चलता है कि कितनी छूट चली गई, तब कुछ किया नहीं जा सकता। और जिस दिन मैं नहीं होता, उस दिन का कोई हिसाब मेरे पास नहीं होता।

ऐप क्या करता है, स्क्रीन दर स्क्रीन

  1. मेरा आज का काम (स्टाफ) — वेटर, शेफ या सफ़ाई वाला अपने फ़ोन पर सिर्फ़ अपने हिस्से के काम देखता है, किसी और का नहीं।
  2. चेकलिस्ट (स्टाफ) — खुलने और बंद होने के तय काम एक-एक करके टिक होते हैं, और जहाँ ज़रूरी है वहाँ फ़ोटो लगती है।
  3. काम बाँटें (मैनेजर) — मैनेजर शिफ्ट के हिसाब से काम किचन, हॉल और सफ़ाई में बाँटता है और अटके काम किसी और को दे देता है।
  4. मंज़ूरी का अनुरोध (मैनेजर) — छूट, झूठन या बाहर से सामान लाने की बात यहीं से मालिक के पास जाती है, फ़ोन करने की ज़रूरत नहीं पड़ती।
  5. मंज़ूरी का डिब्बा (मालिक) — मालिक जहाँ भी हो, अनुरोध पढ़कर हाँ या ना कर देता है और कारण लिख देता है।
  6. आज की शिफ्ट (मालिक और मैनेजर) — एक स्क्रीन पर दिखता है कौन ड्यूटी पर है, कौन से काम बाकी हैं, चेकलिस्ट पूरी हुई या नहीं, और दिन में कितनी छूट और झूठन हुई।

इसे कौन इस्तेमाल करता है और यह क्या दर्ज रखता है

  • स्टाफ — नाम, फ़ोन नंबर, काम क्या है (शेफ, वेटर, कैशियर, सफ़ाई), कौन सी शिफ्ट, और वह ऐप में क्या-क्या कर सकता है। यह सिर्फ़ मालिक और मैनेजर को दिखता है।
  • काम — क्या करना है, किसको करना है, किचन या हॉल, कब तक, हुआ या नहीं, फ़ोटो और स्टाफ की लिखी बात। स्टाफ को अपना काम दिखता है, मैनेजर और मालिक को सबका।
  • चेकलिस्ट का रिकॉर्ड — किस दिन की कौन सी चेकलिस्ट, फ्रिज का तापमान, गैस, सफ़ाई, किसने टिक किया और किस वक़्त। मैनेजर और मालिक पुराने दिन भी खोलकर देख सकते हैं।
  • मंज़ूरी के अनुरोध — किस बात की मंज़ूरी, कितनी रकम, किस मेज़ या किस सामान की, किसने माँगी, हाँ या ना, किसने दी और क्यों। पूरा रिकॉर्ड मालिक के पास रहता है।

कारोबार के लिए क्या बदलता है

काम बोलकर नहीं, लिखकर जाता है, इसलिए भूलने की गुंजाइश नहीं रहती। बंद होने की चेकलिस्ट रोज़ पूरी होती है, तो सुबह किचन तैयार मिलता है और खाना ख़राब होने की शिकायतें कम होती हैं। छूट और झूठन मंज़ूरी से होते हैं और हर मामला दर्ज रहता है, तो महीने के आख़िर में चौंकना नहीं पड़ता। मैनेजर के छोटे-छोटे फ़ोन बंद हो जाते हैं। नया वेटर आए तो उसका काम उसके फ़ोन पर पहले से लिखा मिलता है, समझाने में वक़्त नहीं लगता। और जिस दिन मालिक रेस्तरां में नहीं होता, उस दिन भी उसे पता रहता है कि क्या हुआ।

वह एक फ़ैसला जो मायने रखता है

सबसे बड़ा फ़ैसला यह है कि छूट और झूठन की मंज़ूरी काम रोककर ली जाए या बाद में दर्ज हो। पहला रास्ता, मैनेजर अनुरोध भेजे और मालिक की हाँ आने तक रुका रहे। दूसरा रास्ता, मैनेजर अपने हिसाब से फ़ैसला ले ले, ऐप में दर्ज हो जाए और मालिक रात में देख ले। बीच का रास्ता लें। एक छोटी रकम की सीमा तय करें जिसके अंदर मैनेजर ख़ुद मंज़ूर कर दे, और उससे ऊपर का हर अनुरोध मालिक के पास जाए। कारण साफ़ है, मेज़ पर बैठे मेहमान को इंतज़ार कराना उस छोटी छूट से ज़्यादा महंगा पड़ता है, लेकिन बड़ी रकम बिना मालिक की नज़र के नहीं जानी चाहिए।

पहले क्या बनाएँ, और क्या बाद में

पहले सिर्फ़ चार चीज़ें बनाएँ, रोज़ का काम बाँटना, खुलने और बंद होने की चेकलिस्ट, मंज़ूरी के अनुरोध, और मालिक के लिए दिन की एक स्क्रीन। हाज़िरी, छुट्टी, तनख़्वाह, स्टोर का सामान, सप्लायर के ऑर्डर और स्टाफ की रेटिंग बाद में जोड़ें। कारण यह है कि अगर पहले ही दिन स्टाफ को दस चीज़ें भरनी पड़ें तो टीम ऐप छोड़कर फिर आवाज़ देने लगेगी।

BooDoo इसे कैसे बनाता है

आप यही बात अपनी भाषा में लिखकर दे दें, BooDoo ऐप बना देता है। पीछे असली डेटाबेस और लॉगिन बनता है, और मालिक, मैनेजर और स्टाफ को अलग-अलग स्क्रीन दिखती हैं। एक ही माँग से अपने पते पर चलती वेबसाइट और Android ऐप मिलता है, जिसे आप अपने Google Play खाते से स्टाफ के लिए डाल सकते हैं, और अपना डोमेन भी जोड़ सकते हैं। आगे कुछ बदलना हो तो बदलाव लिखकर बता दें। रेस्तरां जैसे कामों के बने-बनाए ऐप लाइव देखकर अपने यहाँ कॉपी करके बदल भी सकते हैं। ख़ुद न बनाना चाहें तो BooDoo Launch बना देता है।

कैसे पता चलेगा कि यह काम कर रहा है

रात साढ़े ग्यारह बजे मालिक ऐप खोलता है और बंद होने की चेकलिस्ट पूरी टिक की हुई, फ़ोटो के साथ दिखती है, और उस दिन उसने किसी को एक भी फ़ोन नहीं किया।

इसे बनाइए

यह अनुरोध चिपकाइए और ऐप बन जाएगा।

मेरा एक रेस्तरां है, दो शिफ्ट में चलता है, किचन में चार लोग, हॉल में पाँच वेटर और एक मैनेजर। मुझे स्टाफ के लिए फ़ोन ऐप और पीछे वेबसाइट चाहिए जिसमें मैं और मैनेजर रोज़ के काम बाँट सकें, किचन के काम किचन वालों को, टेबल और हॉल के काम वेटरों को, सफ़ाई का काम अलग। स्टाफ अपने फ़ोन पर सिर्फ़ अपना काम देखे और होने पर टिक करे, खुलने और बंद होने की चेकलिस्ट में फ्रिज का तापमान, गैस और सफ़ाई हो, और कुछ कामों में फ़ोटो लगाना ज़रूरी हो। छूट, झूठन और बाहर से सामान लाने की मंज़ूरी का अनुरोध मैनेजर मेरे पास भेजे और मैं फ़ोन से हाँ या ना करूँ, छोटी रकम मैनेजर ख़ुद मंज़ूर कर ले। मुझे एक स्क्रीन पर आज की शिफ्ट दिखे, कौन ड्यूटी पर है, कौन से काम अटके हैं, और दिन में कितनी छूट और झूठन हुई। मालिक, मैनेजर और स्टाफ के लॉगिन अलग हों।

यह अनुरोध चिपकाइए और ऐप बन जाएगा, असली डेटाबेस, साइन-इन और फ़ोन ऐप के साथ। बाद में कुछ भी बदल सकते हैं।

इसी तरह के तैयार ऐप

पहले चलाकर देखिए, फिर अपने वर्कस्पेस में कॉपी करके अपना बना लीजिए।

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