रेस्तरां टेबल बुकिंग ऐप - कॉल और व्हाट्सऐप की बुकिंग एक कैलेंडर में
फोन से बुकिंग, व्हाट्सऐप से बुकिंग - सब एक कैलेंडर में दिख जाती है, कुछ नहीं भूलता।
Take bookings · Restaurant · India
फोन से बुकिंग, व्हाट्सऐप से बुकिंग - सब एक कैलेंडर में दिख जाती है, कुछ नहीं भूलता।
यह किसके लिए है
शहर के किसी भी इलाके का फैमिली रेस्तरां, जहां अंदर बैठने की जगह है और ऊपर छत पर भी। मालिक खुद गल्ले पर रहते हैं, दो-तीन लड़के सर्विस में, एक कैशियर और रसोई का स्टाफ। दिक्कत शनिवार-रविवार की शाम को पकड़ती है, जब काउंटर का फोन बजता रहता है, व्हाट्सऐप पर अलग से मैसेज आते हैं, और सामने दरवाजे पर एक फैमिली खड़ी है जो कहती है कि उसने सुबह ही टेबल बुक कराया था।
आज की परेशानी
बुकिंग काउंटर पर रखी एक कॉपी में लिखी जाती है। कोई फोन करता है तो नाम और कितने लोग लिख लिए जाते हैं, कोई व्हाट्सऐप पर पूछता है तो वह मैसेज चैट में ही पड़ा रह जाता है। शाम को जब भीड़ होती है तो पता चलता है कि एक ही टेबल दो लोगों को दे दिया गया, और एक का नाम कॉपी में चढ़ा ही नहीं था। जो लोग बुक कराकर आते ही नहीं, उनका टेबल खाली पड़ा रहता है और चलते ग्राहक को मना करना पड़ता है। मालिक को यह भी ठीक से नहीं पता कि इस हफ्ते किस दिन कितनी बुकिंग आईं, क्योंकि कॉपी का हिसाब कोई जोड़ता नहीं।
ऐप क्या करता है, स्क्रीन दर स्क्रीन
- बुकिंग पेज — ग्राहक यहां तारीख, समय, कितने लोग और अंदर या छत चुनकर खुद टेबल बुक करता है।
- मेरी बुकिंग — ग्राहक अपनी बुकिंग देखता है, समय बदलवाता है या रद्द करता है, और यहीं से व्हाट्सऐप पर रेस्तरां से बात कर सकता है।
- आज का कैलेंडर — स्टाफ यहां दिन की सारी बुकिंग एक साथ देखता है, कन्फर्म करता है, टेबल बदलता है और फोन या व्हाट्सऐप पर आई बुकिंग हाथ से जोड़ता है।
- रिमाइंडर — स्टाफ यहां से आने से पहले ग्राहक को याद दिलाने का मैसेज भेजता है और देखता है किसका जवाब आया।
- टेबल और समय की सेटिंग — मालिक यहां बैठने की जगह, खुलने-बंद होने का समय, छुट्टी के दिन और एक समय में कितनी बुकिंग लेनी हैं, यह तय करता है।
- हिसाब — मालिक यहां देखता है किस दिन और किस समय कितनी बुकिंग आईं, कितने लोग आए नहीं और कितनी रद्द हुईं।
इसे कौन इस्तेमाल करता है और यह क्या दर्ज रखता है
- बुकिंग — ग्राहक का नाम और नंबर, तारीख और समय, कितने लोग, अंदर या छत, कौन सा टेबल, कहां से आई बुकिंग - फोन, व्हाट्सऐप या वेबसाइट, और उसकी हालत - कन्फर्म, आ गए, नहीं आए या रद्द। स्टाफ और मालिक दोनों देखते हैं, ग्राहक सिर्फ अपनी।
- ग्राहक — नाम, फोन नंबर, पहले कितनी बार आए, क्या कभी बुक कराकर नहीं आए, और कोई खास बात जैसे बच्चों की कुर्सी या खिड़की वाला टेबल। सिर्फ स्टाफ और मालिक देखते हैं।
- बैठने की जगह — टेबल का नंबर, कितने लोग बैठ सकते हैं, अंदर है या छत पर। मालिक बदलता है, स्टाफ देखता है।
- समय और छुट्टी — हर दिन खुलने और बंद होने का समय, कितने-कितने समय पर बुकिंग लेनी है, त्योहार या बंदी के दिन। सिर्फ मालिक बदलता है।
- स्टाफ — नाम, नंबर और क्या वह बुकिंग जोड़ या रद्द कर सकता है। सिर्फ मालिक देखता और बदलता है।
कारोबार के लिए क्या बदलता है
एक ही जगह पर सारी बुकिंग दिखने लगती हैं, चाहे फोन से आई हों, व्हाट्सऐप से या वेबसाइट से। एक टेबल दो लोगों को देने की गलती बंद हो जाती है। जो नाम कॉपी में चढ़ना रह जाता था, वह अब छूटता नहीं। आने से पहले मैसेज चला जाता है, इसलिए बुक कराकर न आने वाले कम होते हैं और वह टेबल किसी और को दिया जा सकता है। काउंटर पर खड़े लड़के का आधा समय फोन पर बात करने में नहीं जाता। और मालिक को शाम से पहले पता रहता है कि आज कितनी भीड़ आने वाली है, तो रसोई और स्टाफ की तैयारी उसी हिसाब से होती है।
वह एक फ़ैसला जो मायने रखता है
सबसे बड़ा फैसला यह है कि बुकिंग पर पहले से कुछ पैसा लिया जाए या नहीं। पैसा लेने से बुक कराकर न आने वाले कम होते हैं, पर आम फैमिली ग्राहक को यह अखरता है और वह बुकिंग छोड़कर सीधे चला आता है या कहीं और चला जाता है। शुरू में पैसा मत लीजिए। उसकी जगह ग्राहक से बुकिंग कन्फर्म कराइए और आने से पहले रिमाइंडर भेजिए। अगर आगे चलकर दिखे कि बड़े ग्रुप और शनिवार-रविवार की शाम में खाली टेबल ज्यादा जा रहे हैं, तो सिर्फ उन्हीं बुकिंग पर थोड़ी रकम पहले से लेने का इंतजाम जोड़ लीजिए, पूरे दिन के लिए नहीं।
पहले क्या बनाएँ, और क्या बाद में
पहले सिर्फ इतना बनाइए - ग्राहक का बुकिंग पेज, स्टाफ का दिन वाला कैलेंडर जिसमें फोन और व्हाट्सऐप की बुकिंग हाथ से जुड़ जाए, और आने से पहले का रिमाइंडर। टेबल का नक्शा, बार-बार आने वाले ग्राहकों की छूट, खाने का मेन्यू पहले से चुनने की सुविधा और एंड्रॉइड ऐप बाद के लिए रख दीजिए। जो चीज रोज शाम को भारी पड़ती है वह बुकिंग का गड्डमड्ड होना है, बाकी सब उसके बाद की बात है।
BooDoo इसे कैसे बनाता है
आप अपनी भाषा में बता देते हैं कि रेस्तरां में बुकिंग कैसे आती है और क्या-क्या दिखना चाहिए, BooDoo उसी से ऐप बना देता है। पीछे का पूरा इंतजाम तैयार मिलता है - बुकिंग का रिकॉर्ड और मालिक, स्टाफ और ग्राहक के अलग-अलग लॉगिन, जिससे तीनों को अपनी ही स्क्रीन दिखे। वेबसाइट अपने पते पर चलती है और अपना डोमेन जोड़ा जा सकता है, एंड्रॉइड ऐप भी उसी बात से बन जाता है। रिमाइंडर के मैसेज, रेस्तरां का नक्शा और हर बुकिंग पर व्हाट्सऐप बटन तैयार जोड़ के साथ लग जाते हैं। आगे कुछ बदलवाना हो तो बस बोलकर बदलवा लीजिए।
कैसे पता चलेगा कि यह काम कर रहा है
शनिवार की शाम काउंटर का फोन पहले जितना नहीं बजता, और दरवाजे पर कोई यह कहकर खड़ा नहीं होता कि उसने टेबल बुक कराया था पर कॉपी में नाम नहीं है। स्टाफ कैलेंडर खोलकर नाम बता देता है और सीधे टेबल पर बिठा देता है।
इसे बनाइए
यह अनुरोध चिपकाइए और ऐप बन जाएगा।
मेरा फैमिली रेस्तरां है, अंदर और छत पर बैठने की जगह है। मुझे एक वेबसाइट चाहिए जहां ग्राहक खुद तारीख, समय, कितने लोग और अंदर या छत चुनकर टेबल बुक कर ले और बुकिंग होने पर उसे मैसेज चला जाए। जो बुकिंग फोन पर या व्हाट्सऐप पर आती हैं, उन्हें मेरा स्टाफ उसी कैलेंडर में हाथ से जोड़ सके। स्टाफ को दिन का कैलेंडर दिखे और वहीं से कन्फर्म करना, टेबल बदलना, समय आगे करना और आने से पहले रिमाइंडर भेजना हो जाए। मैं मालिक के तौर पर टेबल, खुलने का समय, छुट्टी के दिन और एक समय में कितनी बुकिंग लेनी है, यह सब खुद तय कर सकूं। हर बुकिंग के साथ व्हाट्सऐप बटन हो जिससे सीधे ग्राहक से बात हो जाए। बाद में मुझे एंड्रॉइड ऐप भी चाहिए होगा।
यह अनुरोध चिपकाइए और ऐप बन जाएगा, असली डेटाबेस, साइन-इन और फ़ोन ऐप के साथ। बाद में कुछ भी बदल सकते हैं।
इसी तरह के तैयार ऐप
पहले चलाकर देखिए, फिर अपने वर्कस्पेस में कॉपी करके अपना बना लीजिए।
Restaurant ordering app →