योग स्टूडियो में नकद, यूपीआई, बैंक ट्रांसफर सब तरह की फीस ट्रैक करने का ऐप
नकद, यूपीआई, बैंक ट्रांसफर - किसी भी तरीके से आने वाली फीस एक जगह दर्ज करें और एक नज़र में देखें कौन देना भूल गया।
Invoices and payments · Yoga or dance studio · India
नकद, यूपीआई, बैंक ट्रांसफर - किसी भी तरीके से आने वाली फीस एक जगह दर्ज करें और एक नज़र में देखें कौन देना भूल गया।
यह किसके लिए है
बाज़ार के ऊपर एक या दो हॉल वाला योग या डांस स्टूडियो। सुबह की क्लास मालिक खुद लेते हैं, शाम की बैच दो टीचर संभालते हैं, और रिसेप्शन पर एक व्यक्ति बैठता है जो नए लोगों का नाम लिखता है और फीस लेता है। दिक्कत महीने की चार-पाँच तारीख को काटती है, जब क्लास भरी हुई है और यह याद नहीं आता कि किसने फीस दी और किसने नहीं।
आज की परेशानी
फीस रजिस्टर में लिखी जाती है, लेकिन सब कुछ रजिस्टर तक नहीं पहुँचता। कोई क्लास के बाद जल्दी में नकद थमा जाता है, कोई यूपीआई कर देता है और व्हाट्सऐप पर स्क्रीनशॉट भेज देता है, किसी के पापा बैंक से ट्रांसफर कर देते हैं। महीने के आखिर में तीन जगह मिलाना पड़ता है - रजिस्टर, फोन का मैसेज और बैंक का स्टेटमेंट। जो नहीं मिलता, उसे पूछने में संकोच होता है, और कई बार तो पूछा ही नहीं जाता। कुछ लोग दो-दो महीने बिना फीस दिए क्लास करते रहते हैं और यह बात तब पता चलती है जब वे छोड़कर जा चुके होते हैं। जिनसे गलती से दोबारा फीस माँग ली जाती है, वे नाराज़ होते हैं।
ऐप क्या करता है, स्क्रीन दर स्क्रीन
- छात्र जोड़ने की स्क्रीन — रिसेप्शन का स्टाफ या मालिक नए छात्र का नाम, फोन, बैच और फीस प्लान एक बार भर देता है, जिससे आगे की फीस खुद-ब-खुद गिनी जाती रहती है।
- फीस दर्ज करने की स्क्रीन — स्टाफ उसी वक्त दर्ज करता है कि किसने कितनी फीस दी और नकद, यूपीआई या बैंक ट्रांसफर में से किस तरीके से दी।
- छात्र का अपना फीस पेज — छात्र अपने नाम से अंदर आकर देखता है कि उसकी अगली फीस कब की है, कितनी बाकी है और पिछली रसीदें कौन-कौन सी हैं।
- बाकी फीस की सूची — मालिक और स्टाफ एक नज़र में देखते हैं किसकी फीस अटकी है और कितने दिन से, ऊपर सबसे पुरानी वाली।
- याद दिलाने की स्क्रीन — मालिक या स्टाफ वहीं से उस छात्र का व्हाट्सऐप खोलकर नरमी से याद दिला देता है, और यह दर्ज हो जाता है कि कब याद दिलाया गया।
- महीने का हिसाब — सिर्फ मालिक देखता है कि इस महीने नकद में कितना आया, यूपीआई में कितना, बैंक में कितना और कितना आना बाकी है।
इसे कौन इस्तेमाल करता है और यह क्या दर्ज रखता है
- छात्र — नाम, फोन नंबर, कौन सा बैच, कब से आ रहे हैं, कौन सा फीस प्लान और फीस की तारीख। मालिक और रिसेप्शन का स्टाफ सबको देख सकता है, छात्र सिर्फ अपनी जानकारी।
- फीस प्लान — प्लान का नाम जैसे महीने का, तीन महीने का या दस क्लास का पैकेज, उसकी रकम और कितने दिन चलेगा। प्लान मालिक बनाता और बदलता है, स्टाफ सिर्फ चुन सकता है।
- फीस की एंट्री — कितनी रकम आई, किस तरीके से आई, किस तारीख को आई, किस छात्र की थी, किसने ली और रसीद नंबर। मालिक सब देखता है, स्टाफ अपनी ली हुई एंट्री, छात्र अपनी रसीदें।
- याद दिलाने का रिकॉर्ड — किस छात्र को, किस तारीख को याद दिलाया गया और किसने दिलाया। यह सिर्फ मालिक और स्टाफ को दिखता है, छात्र को नहीं।
कारोबार के लिए क्या बदलता है
फीस किसी भी तरीके से आए, वह एक ही जगह दर्ज होती है, इसलिए महीने के आखिर में रजिस्टर, फोन के मैसेज और बैंक स्टेटमेंट मिलाने में शाम नहीं जाती। बाकी फीस की सूची खुद सामने रहती है, तो कोई दो महीने मुफ्त क्लास करके चुपचाप नहीं निकल जाता। याद दिलाना समय पर और एक जैसी बात में होता है, इसलिए माँगने में झिझक नहीं रहती। जिसने फीस दे दी है, उससे दोबारा नहीं माँगी जाती, और छात्र अपनी रसीद खुद देख लेता है तो बहस नहीं होती।
वह एक फ़ैसला जो मायने रखता है
सबसे बड़ा फैसला यह है कि फीस का महीना कब से गिना जाए। एक तरीका है सबकी फीस महीने की पहली तारीख को, चाहे वे कभी भी जुड़े हों - हिसाब सीधा रहता है, पर बीच महीने में जुड़ने वाले से आधी फीस की बहस हर बार होती है। दूसरा तरीका है हर छात्र का महीना उसी तारीख से गिना जाए जिस दिन वह जुड़ा था। गिनती का काम ऐप करेगा, आपको याद नहीं रखना है, इसलिए दूसरा तरीका चुनें। इससे न आधी फीस का झगड़ा होता है, न किसी का हक मारा जाता है, और सूची रोज़ अपने आप बताती रहती है कि आज किस-किस की तारीख आ गई है।
पहले क्या बनाएँ, और क्या बाद में
पहले बस इतना बनाइए - छात्र और उनका फीस प्लान, किसी भी तरीके से आई फीस दर्ज करना, बाकी फीस की सूची और व्हाट्सऐप से याद दिलाना। यही चार चीज़ें आज का दर्द खत्म कर देती हैं। ऐप के अंदर से ऑनलाइन पैसे लेना, हाज़िरी, टीचर का हिस्सा और साल भर की रिपोर्ट बाद के लिए रखिए। पहले रिसेप्शन वाले की आदत बननी चाहिए कि हर फीस वहीं दर्ज हो, वरना बाद में जोड़ी हुई चीज़ें भी खाली पड़ी रहेंगी।
BooDoo इसे कैसे बनाता है
आपको अपनी भाषा में बस यह बताना है कि स्टूडियो कैसे चलता है और फीस कैसे आती है। BooDoo इसका पूरा पीछे का काम बनाता है - छात्रों और फीस का रिकॉर्ड, और मालिक, स्टाफ और छात्र के लिए अलग-अलग लॉगिन, जिसमें हर किसी को अपनी ही स्क्रीन दिखे। उसी एक बात से वेबसाइट अपने पते पर चालू हो जाती है और एंड्रॉयड ऐप भी मिलता है, जिसे आप अपने गूगल प्ले खाते से डाल सकते हैं। याद दिलाने के लिए व्हाट्सऐप बटन जोड़ा जा सकता है और आगे ऑनलाइन फीस लेनी हो तो पेमेंट भी। कुछ बदलवाना हो तो बस बोल दीजिए।
कैसे पता चलेगा कि यह काम कर रहा है
महीने की पाँच तारीख को आप बाकी फीस की सूची खोलते हैं और उसमें दो-तीन नाम ही होते हैं, वे भी ऐसे जिन्हें कल ही याद दिलाया गया था। रजिस्टर, फोन और बैंक मिलाने बैठना बंद हो जाता है।
इसे बनाइए
यह अनुरोध चिपकाइए और ऐप बन जाएगा।
मेरा योग और डांस स्टूडियो है जिसमें सुबह-शाम तीन बैच चलते हैं, और मुझे फीस का हिसाब रखने वाला ऐप चाहिए जहाँ हर छात्र को उसके बैच और फीस प्लान के साथ जोड़ दूँ और उसकी फीस की तारीख उसके जुड़ने के दिन से गिनी जाए। जब कोई क्लास के बाद नकद दे, यूपीआई करे या घर से बैंक ट्रांसफर करे, तो रिसेप्शन पर बैठा स्टाफ वही तरीका चुनकर उसी वक्त फीस दर्ज कर दे और छात्र को रसीद मिल जाए। एक स्क्रीन ऐसी हो जिसमें साफ दिखे किसकी फीस बाकी है और कितने दिन से, और वहीं से उस छात्र का व्हाट्सऐप खुल जाए ताकि मैं नरमी से याद दिला सकूँ। छात्र लॉगिन करके सिर्फ अपनी फीस और रसीदें देखे, स्टाफ फीस दर्ज कर सके, और महीने में नकद, यूपीआई और बैंक से कितना आया यह सिर्फ मुझे दिखे। वेबसाइट बना दो और साथ में एंड्रॉयड ऐप भी।
यह अनुरोध चिपकाइए और ऐप बन जाएगा, असली डेटाबेस, साइन-इन और फ़ोन ऐप के साथ। बाद में कुछ भी बदल सकते हैं।
इसी तरह के तैयार ऐप
पहले चलाकर देखिए, फिर अपने वर्कस्पेस में कॉपी करके अपना बना लीजिए।
Gym membership app →